तारातला हादसे में पूर्व मेयर फिरहाद एवं दो पार्षदों के नाम शिकायत दर्ज; मरने वालों की संख्या हुई 17
'220 से 230 सीटें जीतते, लेकिन हमारा जनादेश लूट लिया गया!'
कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित नतीजों के बाद करीब 20 दिनों की लंबी रहस्यमयी चुप्पी को तोड़ते हुए आखिरकार तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी रविवार को जनता के सामने आईं। सूबे में हुए सत्ता परिवर्तन और 4 मई को आए चुनावी नतीजों के बाद यह पहला मौका था जब उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक लाइव के जरिए सीधे जनसंवाद किया। इस दौरान उनके भीतर का आक्रोश साफ देखने को मिला, जहां उन्होंने नवगठित भाजपा सरकार से लेकर चुनाव आयोग तक को कटघरे में खड़ा करते हुए एक के बाद एक कई सनसनीखेज और गंभीर आरोप जड़ दिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर इस पूरे चुनाव की साख पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र का प्रहसन करार दिया।
ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़ा दावा किया कि जमीनी हकीकत के मुताबिक उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को इस चुनाव में आसानी से 220 से 230 सीटें मिलनी चाहिए थीं, लेकिन एक सोची-समझी साजिश के तहत पूरे पासे को ही पलट दिया गया। उन्होंने राष्ट्रीय चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मतदान के डेटा को बड़े पैमाने पर हैक किया गया, जिसकी पुख्ता जानकारी और सबूत उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम 150 से अधिक विधानसभा सीटों पर चुनावी परिणामों के साथ भयंकर हेरफेर की गई, जहां तृणमूल की जीत शत-प्रतिशत तय थी, वहां काउंटिंग टेबल पर नतीजों को बदल दिया गया। उनके मुताबिक, इस हार में आम जनता का कोई कसूर नहीं है, बल्कि पूरी चुनावी मशीनरी को ही हाईजैक कर लिया गया था।
अपने इस लाइव संबोधन में ममता बनर्जी ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल पर गहरी चिंता और खौफ का इजहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की जीत के बाद बंगाल में बदले की भावना से डर और खौफ का एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया गया है, जहां आम लोग अपनी नौकरी और कारोबारी अपनी सुरक्षा को लेकर बुरी तरह सहमे हुए हैं। उन्होंने भाजपा पर चुनाव लूटने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के दो से ढाई हजार से अधिक निष्ठावान कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमों में जेल में ठूस दिया गया है, गरीब हॉकर्स की रोजी-रोटी छीनी जा रही है और तृणमूल के पार्टी दफ्तरों को बर्बरता से तोड़ा जा रहा है। इसी सिलसिले में उन्होंने सुदीप पोल्ले नाम के व्यक्ति की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहलगाम हादसे में मृत व्यक्ति के पीडि़त परिवार की मदद करने के बावजूद उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया, जो यह दर्शाता है कि कानून का राज खत्म हो चुका है।